पूरी घटना (कब, कहाँ और कैसे हुआ?)
यह वारदात 30 मई, 2026 को उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के शिकोहाबाद स्थित यादव कॉलोनी में हुई ।
पीड़ित: डेढ़ साल (18 महीने) का मासूम बच्चा आरव ।
आरोपी: जितेंद्र पाठक उर्फ विराज (24 वर्षीय), जो बदायूँ का रहने वाला था और पीड़िता की माँ का रिश्ते में जीजा (बहनोई) लगता था ।
वारदात कैसे हुई?
आरोपी विराज बच्चे की माँ रति से शादी करना चाहता था, लेकिन रति ने उसका प्रस्ताव ठुकरा दिया था क्योंकि वह पहले से शादीशुदा थी और उसका एक बच्चा था । विराज बच्चे आरव को अपनी शादी की राह में रोड़ा समझता था ।
वारदात के दिन, विराज ने बच्चे को टॉफी दिलाने के बहाने घर से बाहर निकाला और करीब 50 मीटर दूर एक सुनसान सड़क पर ले गया । वहाँ उसने मासूम बच्चे को 27 सेकंड के अंदर करीब 8 बार ज़मीन पर पटका, जिससे उसकी मौत हो गई । इसके बाद आरोपी बच्चे के शव को कंधे पर उठाकर घर के बाहर फेंक कर फरार हो गया ।
CCTV फुटेज: सबसे अहम सबूत
यह पूरी वारदात आस-पास लगे CCTV कैमरे में कैद हो गई । जब यह फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो पूरे देश में आक्रोश फैल गया । CCTV फुटेज को कोर्ट में सबसे अहम सबूत माना गया । एक रिपोर्ट के मुताबिक, जब कोर्ट में यह फुटेज चलाया गया तो आरोपी ने खुद को थप्पड़ मारना शुरू कर दिया और वह बुरी तरह विचलित हो गया ।
पुलिस की तेज़ कार्रवाई और गिरफ्तारी
गिरफ्तारी: वारदात के करीब 6 घंटे बाद पुलिस ने आरोपी को मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार कर लिया । इस मुठभेड़ में आरोपी के दोनों पैरों में गोलियाँ लगीं ।
चार्जशीट: पुलिस ने इस मामले में बहुत तेज़ी दिखाते हुए वारदात के 6 दिनों के भीतर ही कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी ।
गवाह: मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने 13 गवाह पेश किए, जबकि बचाव पक्ष की ओर से केवल एक गवाह पेश किया गया ।
कोर्ट का फैसला और सज़ा
फैसला: फिरोजाबाद की जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. बब्बू सारंग की अदालत ने 10 जुलाई, 2026 को आरोपी को मौत की सज़ा सुनाई ।
जुर्माना: मौत की सज़ा के साथ, कोर्ट ने आरोपी पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया ।
सज़ा का आधार: कोर्ट ने इसे "दुर्लभतम मामला" (rarest of rare case) करार दिया क्योंकि एक मासूम और निर्दोष बच्चे के साथ अत्यंत क्रूरता और पूर्व-नियोजित तरीके से हत्या की गई थी ।
कोर्ट ने अपने आदेश में क्या कहा?
"एक असहाय डेढ़ साल के बच्चे की हत्या, जो अत्यधिक क्रूरता और बिना किसी उकसावे के की गई, ने समाज की सामूहिक चेतना को झकझोर दिया है। चूंकि कम सज़ा को सही ठहराने के लिए कोई कम करने वाली परिस्थितियाँ मौजूद नहीं हैं, इसलिए आरोपी मौत की सज़ा का हकदार है।"
पीड़िता की माँ ने क्या कहा?
बच्चे की माँ रति शर्मा ने आरोपी के खिलाफ सख्त से सख्त सज़ा की माँग की थी। उन्होंने कहा:
“मेरा बेटा मासूम था। मुझे न्याय चाहिए। आरोपी को ऐसी सज़ा मिलनी चाहिए जो समाज के लिए एक मिसाल बने।”
निष्कर्ष
यह केस अपनी तेज़ सुनवाई के लिए चर्चा में रहा क्योंकि अदालत ने वारदात के महज़ 40 दिनों के भीतर फैसला सुना दिया । हालांकि, मौत की सज़ा को अंतिम रूप देने के लिए अब इसे इलाहाबाद हाईकोर्ट में भेजा जाएगा, जहाँ इस पर अंतिम फैसला होगा । यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि CCTV फुटेज और तेज़ पुलिस जाँच गंभीर अपराधों में न्याय दिलाने में कितनी अहम भूमिका निभा सकते हैं ।